Monday, February 9, 2009

ग्लैमर की चाशनी जरूरी नहीं

पूनम यादव से हुई खास बातचीत के कुछ खट्टे- मिट्ठे पहलू

पूनम चौबे

सारेगामापा-2007 की प्रतिभागी और पॉकेट साइज पावरहाउस के नाम से इस जानी जानेवाली पूनम यादव काफी शांत प्रकृति की हैं। इस कार्यक्रम के जरिये खुद को सफलता की बुलंदियों की ओर पहुंचानेवाली पूनम आज भी एक घरेलू लड़की की तरह ही हैं। घर के सभी कामों से लेकर अपना हर काम वह खुद करना ही पसंद करती हैं. संगीत के प्रति खुद को समर्पित करनेवाली उत्तरप्रदेश, लखनऊ की पूनम यादव एक बेटी के साथ एक मां का फर्ज भी बखूबी निभा रहीं है. जी हां! हममें से शायद कुछ लोगों को ही यह बात पता हो, कि पूनम ने अपने पड़ोस में रहनेवाली एक बच्ची (सिमरन) को गोद लीया है. सिमरन उन्हें बुआ कहती हैं। उसकी परवरिश की पूरी जिम्मेदारी इन्होंने खुद ही उठायी है। पूनम के लिए उनकी मां के अलावा रफी साहब, अबुल कलम और लता मंगेशकर आदर्श हैं। उनक मानना है कि किसी भी रियलिटी शो में एसएमएस द्वारा एक सही प्रतिभागी को चुनने नियम बिल्कुल ही ग़लत है. आज जिस तरह से रियलिटी शोज की संख्या बढ़ती जा रही हैं, उससे यही लगता है कि अब गाने को कम और परफार्मेंस को ज्यादा तवजजों दिया जा रहा है. अपनी दिनचर्या को हमसे शेयर करते हुए उन्होंने बताया, कि वह हर रोज दरगाह पर जाना नहीं भूलती . उन्हें शापिंग करना और गाने सुनना का पसंद हैे. सादगी और शांतिपसंद पूनम को बहुत जल्द प्रसिद्धि पाने की कोई चाह नहीं है. वह अपने गाने में अपनी मेहनत से निखार लाना चाहती हैं, न कि खुद को ग्लैमर और चकाचौंध से भरी दुनिया में किसी शॉर्टकट तरीके को अपना कर. झारखंड में पहली बार आना और यहां के लोगों से मिलना , उन्हें बहुत अच्छा लगा । यहां के लोगोंके लिए उनक एक ही संदेश है- हमेशा यूं ही हम कलाकारों के गाने सुनते रहें और हमें अपना प्यार देते रहें.

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