Tuesday, February 24, 2009
एनर्जी, फ्रेशनेस और गुप्र कैमेस्टी यानी बैंड आफ ब्वॉयज
पैशन व एक दूसरे पर विश्वास है बैंड आफ ब्वॉयज की ताकत. वर्ष 2000 में बना यह बैंड अब तक देश-विदेश में कई शोज कर चुका है। बैंड आफ ब्वॉयज के अंदाज व आवाज के कायल हैं
अनुप्रिया अनंत/पूनम चौबे
फ़िल्म रॉक ऑन हकीकत के बेहद करीब है। इसमें किसी रॉक बैंड में होनेवाले उतार-चढ़ाव को वास्तविकता से बेहद खूबसूरती से स्क्रीन पर दर्शाया गया है। यह सच है कि एक अकेला व्यक्ति जब अपनी पहचान बनाता है, तो उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पर कई चीजें उसके बस में होती हैं। पर जब आप एक ग्रुप में काम करते हैं, तो व्यक्तिगत पहचान के लिए नहीं, बल्कि उस ग्रुप की कामयाबी के लिए कोशिश करते hai। बैंड आफ ब्वॉयज भी कुछ ऐसे ही परिवार की तरह है, जिसमें हर सदस्य की कामयाबी ही सफलता है। पिछले दिनों युवा महोत्सवों में शिरकत करने आये बैंड आफ ब्वॉयज चिंटू, करण, सिद्धार्थ व सरीन का कुछ ऐसा ही मानना है। वर्ष 2000 में पहली बार भारत में इंडियन रॉक बैंड आफ ब्वॉयज की शुरुआत हुई और मेरी नींद उड़ गयी है, मेरा चैन खो गया है के हिट गीत के साथ इनकl एलबम आया, तो युवा इनकी आवाज और अंदाज दोनों के कायल हो गये। बैंड आफ ब्वॉयज को पहचाने दिlaने में इन चारों ने काफी मेहनत की। जब पहली बार लड़कीयों का बैंड विवा आया व वह बेहद पॉपुलार भी हो गया. उसके बावजूद बैंड को लॉन्च करना और पॉपुlaiरिटी हासिल करना आसान नहीं था. पर बैंड आफ ब्वॉयज ने दूसरा रास्ता अपनाया. कुढ़ को टीवी पर लॉन्च करने से पहले इन्होंने कई कॉleज, रोड शोज व कई स्टेज शोज किये और आम लोगो की नजर में अपनी पहचान बनायी. वे बताते हैं कि स्ट्रगल का अंत नहीं है. इन loगों ने अपने बैंड के लिए अपने प्रोफेशन तक को छोड़ दिया. चिंटू ने बिग एफएम आरजे की नौकरी, सरीन ने टेleविजन से एक्टिंग, सिद्धार्थ ने फिटनेस व डांसिंग टट्रेनर व करण ने भी कुछ समय के लिए एक्टिंग को विराम दिया. करण ने सफर अपना अपना, साया, जस्सी, अंताक्षरी समेत कई शोज किये हैं। सरीन मूवर्स एंड शेखर्स, कोई अपना सा जैसे सीरियल्स में नजर आयें. इन सभी ने बकायदा क्लास्सिकल म्यूजिक की टनिंग ली है. सिद्धार्थ के पिता अमर हल्दी सुप्रसिद्ध प्यानो आर्टिस्ट थे, इसलिए सिद्वार्थ बचपन से ही संगीत से जुड़े रहे. चिंटू अच्छे गिटारिस्ट हैं, सिद्धार्थ अच्छे डांसर, करण व सरीन लिखने में माहिर हैं. ये चारों ही म्यूजिकलोन इंस्टूमेंट भी बजाते हैं. उन्होंने बिना रुके, बगैर किसी ब्रेक के चार शहरों में लागातार शो किया, जो उनके लिए वाकई टफ व सुखद अनुभव रहा. युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पैशन हो और आत्मविश्वास हो, तो जिंदगी में कुछ भी हासिल करना करना मुस्किल नहीं.
काश किसी के अन्दर न हो काला बन्दर
Thursday, February 12, 2009
बालभवन का निर्माण करवाऊंगी : पूजा चटर्जी

Tuesday, February 10, 2009
रोशन है उम्मीद तुम से ही
anita tanviMonday, February 9, 2009
ग्लैमर की चाशनी जरूरी नहीं
पूनम यादव से हुई खास बातचीत के कुछ खट्टे- मिट्ठे पहलू
पूनम चौबे
सारेगामापा-2007 की प्रतिभागी और पॉकेट साइज पावरहाउस के नाम से इस जानी जानेवाली पूनम यादव काफी शांत प्रकृति की हैं। इस कार्यक्रम के जरिये खुद को सफलता की बुलंदियों की ओर पहुंचानेवाली पूनम आज भी एक घरेलू लड़की की तरह ही हैं। घर के सभी कामों से लेकर अपना हर काम वह खुद करना ही पसंद करती हैं. संगीत के प्रति खुद को समर्पित करनेवाली उत्तरप्रदेश, लखनऊ की पूनम यादव एक बेटी के साथ एक मां का फर्ज भी बखूबी निभा रहीं है. जी हां! हममें से शायद कुछ लोगों को ही यह बात पता हो, कि पूनम ने अपने पड़ोस में रहनेवाली एक बच्ची (सिमरन) को गोद लीया है. सिमरन उन्हें बुआ कहती हैं। उसकी परवरिश की पूरी जिम्मेदारी इन्होंने खुद ही उठायी है। पूनम के लिए उनकी मां के अलावा रफी साहब, अबुल कलम और लता मंगेशकर आदर्श हैं। उनक मानना है कि किसी भी रियलिटी शो में एसएमएस द्वारा एक सही प्रतिभागी को चुनने नियम बिल्कुल ही ग़लत है. आज जिस तरह से रियलिटी शोज की संख्या बढ़ती जा रही हैं, उससे यही लगता है कि अब गाने को कम और परफार्मेंस को ज्यादा तवजजों दिया जा रहा है. अपनी दिनचर्या को हमसे शेयर करते हुए उन्होंने बताया, कि वह हर रोज दरगाह पर जाना नहीं भूलती . उन्हें शापिंग करना और गाने सुनना का पसंद हैे. सादगी और शांतिपसंद पूनम को बहुत जल्द प्रसिद्धि पाने की कोई चाह नहीं है. वह अपने गाने में अपनी मेहनत से निखार लाना चाहती हैं, न कि खुद को ग्लैमर और चकाचौंध से भरी दुनिया में किसी शॉर्टकट तरीके को अपना कर. झारखंड में पहली बार आना और यहां के लोगों से मिलना , उन्हें बहुत अच्छा लगा । यहां के लोगोंके लिए उनक एक ही संदेश है- हमेशा यूं ही हम कलाकारों के गाने सुनते रहें और हमें अपना प्यार देते रहें.
क्या यही है incridible भारत की रियल tasvir
टीवी पर इन दिनों एक ऐड लोगों को बेहद अपना-सा लग रहा है. अतिथिदेवो भवः की तर्ज पर आधारित इस विज्ञापन में देश की धरोहरों व यहां आनेवाला हर अतिथियों को सम्मान देने की बात की जा रही है. मिस्टर परफेक्टनिस्ट आमिर खान ने इसमें अहम भूमिका निभाई है, जिसमें विदेशी महिलों को छेड़नेवाले गुंडों को महारास्त्र पुलिस के हवाले करने में आमिर ने अहम भूमिका निभायी. साथ ही आमिर ने ऐड के एंड में पंचलाइन जोड़ा है , यहां आनेवाला हर व्यक्ति हमारे अतिथि हैं और उनका पूरा सम्मान करेंगे. पर क्या वाकई.पिछले कई saalo से लगातार यहां विदेशी सैलानियो के साथ बदसलूकी की जा रही है. गोवा में विदेशी लड़की के साथ रेप व मर्डर, 10 रुपये के समोसे को 1000 रुपये में बेचा जाना और खास तौर से पर्यटन स्थल पर विदेशियों को ठगा जाना हमारे आदर सत्कार की परंपरा के अंदाज हैं. विदेशियों की तो छोड़िए, क्या हम अपने देश में किसी भी राज्य में उनमुक्त होकर घूम सकते हैं. क्या वाकई महाराï पुलिस हमारी दोस्त है. ऐड में जिस तरह मौके पर महाराï police ने पहुंच कर कमाल कर दिखाया, क्या यह हकीकत में संभव है. क्या वाकई महाराï aanevaala हर व्यक्ति अतिथि है. अगर हां, तो फिर मिस्टर परफेक्टनिस्ट जी बिहारियों व उत्तर बिहारियों को इतनी jilat नहीं सहनी पड़ती. दुनिया को सिखाने से पहले अगर पहले महाराï थोड़ी भी सीख ले ले तो न जाने कितनी निर्दोष जाने बच भी जायेंगी. तमाम बातों के बावजूद आवारागर्दी करनेवाले युवाओं को रास्ते पर लेन की अच्छी मुहिम है. दिखावे करनेवाले प्रेमियों द्वारा सांस्कृतिक धरोहर की बर्बादी को रोकने की pahal भी सराहनीय है. पर फिर भी...
२४ घंटे का ग्रीन रेवोलुशन

Saturday, February 7, 2009
मस्ताना मौसम आ गया

युवा दोस्तों अब बस थोरा इंतज़ार वलान्तिने डे नजदीक है मेरे यार। अगर करना है अपने प्यार का इज़हार तो बिना देर किए बोल डाल। countdown इस बिगिन मेरे यार।
What's the mo
st romantic thing you've ever done
As part of our countdown to Valentine's Day next week, we'll be posing readers lots of questions about their romantic experiences and love lives. Come share your stories with us and others, right here and stay tuned for a new topic each day!
· 'He serenaded me with his guitar from below my balcony.'
· 'She created a photo album with my most treasured snaps and personal notes on each.'
· 'I recorded her favourite love songs on a cd -- she still has it, even though it's been seven years now.'
· Do all these romantic Valentine's Day overtures have you sighing and melting into a puddle of warm wax?
· We want you to share your most romantic experiences with us too!
· Tell us about the most memorable Valentine's Day you have ever spent with a loved one and what exactly you did for each other that made it so special.
Friday, February 6, 2009
बुला रही है लाइफ पास जाके देखो

आर जे अमित dhamaal24, Ranchi
लाइफ के कई कलर्स होते हैं। आपको कौन से कलर्स पसंद हैं। कलर्स हर तरफ है. मेरे दोस्त चाहो तो आजमा कर देख लों । ओके, अगर कुछ नहीं तो कम से कम टीवी चला कर तो देख ही सकते हो। आखिर टीवी एड ने हम सबको जिंदगी के हर पहलू से रू-ब-रू जो कराया है। लाइन सुनी सुनाई लगती है न । जी बिल्कुल सही फरमा रहे हैं आप। न आपने केवल यह लाइन आपने सुनी है, बल्कि प्रेसेंत्ली आप अपने टीवी सेट पर bगातार देख भी रहे हैं । इन दिनों टेली विजन सेट पर दिल को छू ले ने वाले ऐसे ऐसे ऐड आ रहे हैं जो इमोशनली आपको टच करते है । प्रेजेंटली सिचुएशन ऐसी हो गयी है कि सीरियल फिल्मों के बीच में जब पहले ऐड आया करते थे, तो तुरंत रिमोट बटन क्लिक हो जाया करते थे । पर अब ऐसा नहीं होता । लोग घंटों ऐसे ऐड्स का इंतजार करते रहते हैं । जिंदगी के हर पहलू को जितनी खूबसूरती से ऐड में दर्शाया जा रहा है, शायद ही किसी माध्यम में दर्शाया जा रहा हो । बात फिल्मों की करें या सीरियल की । जितनी वेराइटी, वेरियेशन आपको ऐड में देखने को मिलेगी । वैसी और कहीं नहीं । हंसी-मजाक, रोना-गाना और साथ-साथ त्योहारों को साथ में सेलेब्रेट करना सबकुछ तो हो रहा है यहां । स्पेसिल्लय फेस्टिल सीजन में ज्वाइंट फैमिली को टारगेट करके कई ऐड बनाए जा रहे हैं । यही नहीं कई ऐड तो अरेंज मैरेज को भी लव मैरेज के रूप में बदल देते हैं । सारे ऐड में सिमले रिटी एक है वह है इमोशन, ÷ुमन इंटरेस्ट और फैमिbी रिbेशन। रिbेशन को बांधने बनाने का काम अगर कोई माध्यम कर रहा है तो वह ऐड ही है , क्योंकि आपके सपने सिर्फŸ आपके नहीं होते । यूनियन बैंक के इस ऐड में पहbे पिता का बेटे के bिए चिंतिंत रहना, फिŸर छोटी-सी बहन का भईया की पढ़ाई के bिए सोने के दांत उगाना रिश्तों की एहमियत तो दर्शाता ही साथ ही यह साबित करता है कि आपके सपनों को पूरा होते देख जितने खुश आप होंगे, उससे कहीं खुश आपके अपने । असb जिंदगी में भी तो यही होता है न । हमारे पेरेंट्स हमारी आंखों से सपने देखते हैं और हमारे रूप में ही उन्हें जीने की कोशिश करते हैं। एक खास बात मोस्ट आफŸ द ऐड्स में ज्वाइट फैमिbी के प्यार को दिखाया जाता रहा है । इस तरह हम कैसे कह सकते हैं कि रिbेशन, टेडिशन व इमोशन जैसी चीजें bोगों में नहीं बिकती । जरा सोचिए, ऐड बनते हैं अपने प्रोडक्ट बेचने के bिए और इसी माध्यम के bिए उपयोग होता है इमोशन का । हां, इस सच को नकार नहीं सकते कि इमोशन अbवेज सेbेबb है, क्योंकि इजbी अबbेबb है । मारुति सुजूकी का ऐड कि की करां बेटा पेटोb खत्म ही नहीं होंदा या फिŸर एसीएb में कस्टमर फŸस्ट प्रीफेेंस जैसी चीजें हर ग्राहक को आकर्षित करेंगी । हाb में शुरू हुए बैंक आफŸ इंडिया का ऐड की वह फŸादर दौड़ते-दौड़ते बेटी का फŸीस जमा करने आता है और शनिवार का दिन होता है । बैंक के बंद होने का समय । क्bोज बोर्ड सामने bटका हुआ । फिŸर भी जब अकाउंट होल्डर काउंटर पर आता है तो बैंक में बैठी महिbा पूछती है पहbे पानी bोगे या ...।ऐड की bोकप्रियता को देखते हुए अब ऐड के कई सि¹ेb भी बन रहे हैं । टाटा इंडिकॉम सुनो दिb की आवाज के दो फŸॉbोअप आ चुके है । इसमें कुछ ही शब्दों में जबरदस्त पंचिंग की गयी है कि सुनसान रास्तों को भी वेकअप कॉb की जरूरत होती है । सच है । कोका कोbा वाbे ऐड में एक जंगbी bड़का कैसे bोगों के बीच आता है और खुशी से झूमने गाने bगता है। चुटकी बजाकर कैसे बƒा एक बूढ़े आदमी का जेब कटने से बचाता है । फिŸर सास कैसे अपने अरेंज मैरेज को bव मैरेज में कनवर्ट करती है । सचमुच ऐड्स ने साबित कर दिया है कि बुbा रही है bाइफŸ पास जाके देखो । यानी आपकी bाइफŸ का अगर सीधा प्रसारण आप देखना चाहते हैं तो बस कुछ मत करिये ऐड्स देखते रहिए । फिŸर चाहे वह अपनी गर्bफ्रेŸंड को पटाने का मामbा हो या जेब में पैसे न हो। फिŸर भी आप्शन है। मिरांडा और स्प्राइट का फ्रेŸशनेस वाbा ऐड bिरीb साबून की याद दिbाता है । हम यह नहीं भूb सकते हैं कि ऐडस का ही कभी कमाb रहा कि कुछ प्रोडक्ट को हम उसके प्रोडक्ट के नाम से जानते हैं । जैसे डाbडा कंपनी का नाम है पर हम वनस्पति को डाbडा ही कहते हैं। धारा धारा है। तेb में अब भी पैराशूट है । सर्फŸ हमेशा वाशिंग पाउडर न बनकर सर्फŸ ही रह गया । यानी अगर आपको कपड़े धोने हैं तो हम यही कहेंगे कि सर्फŸ देना एक चम्मच। ऐसे कई उदाहरण हैं । ऐड में शादी, बƒे, bड़ाई-झगड़े सबकुछ तो होता है । पूरे bाइफŸ का मेbोडामा का अगर स्टार्टर देखना है तो ऐड देखते रहिए । आप दर्शकों से गुजारिश है कि अगbी बार जब भी आप कोई ऐड देखें तो जरा उसे अपनी bाइफŸ से जोड़कर देखें । दिbों में गीत के गजb गुनगुनाने के देखो । क्या सोच रहे हैं जनाब यही जिंदगी है बुbा रही है bाइफŸ नजर मिbा के देखो ।
हजाम नहीं कलाकार कहें

तकनीक से नहीं कंसेप्ट से बनती है फिल्म

जानवर रंगों से distract होते हैं, जबकि titliya रंगों से आकर्षित होती हैं. तितिliyo को अगर अपने कैमरे में कैद करना चाहते हैं तो हमें समय का खास ख्याl रखना होगा. यानी कोई भी फिल्म रिसर्च या धैर्य के बगैर नहीं बन सकती. चेजिंग baterfly, leyopard द lurch , lad द्दाख 29 व ऐसी कई वाइल्ड life फिल्में बना चुके गुरमीत sapal ऐसा ही मानते हैं. वे एक ऐसे युवा फिल्ममेकर हैं, जिनकी फिल्में डिस्कवरी, नेशनl जियोग्राफिक व विभिन्न ग्रीन फिल्म festival का हिस्सा बन चुकी हैं. पिछले दिनों उन्होंने खास बातचीत में बताया कि देहरादून में बचपन बिताने के कारण प्रकृति से जुड़े रहने का मौका मिले इसलिए इस ओर मेरी रुचि बढ़ी. मेरा मानना है कि फिल्म कंसेप्ट से बनती है. तकनीक से नहीं. अगर आपको पता है कि आपको क्या कहना है, किसे कहना है और कहां कहना है तो आप तसवीरों के माध्यम से भी फिल्में बना सकते हैं. उनका मानना है कि डॉक्यूमेंटri फिल्मों का भविष्य बेहद ujjawal है. गुरमीत ने देहरादून से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद आइआइएमसी, delhi से रेडियो व television विजन ब्रॉडकास्टिंग कोर्स पूरा किया. इसके बाद उन्होंने कई टीवी कार्यक्रर्मों में एसोसियेट प्रोडयूसर के रूप में काम किया. मीडिया में कुछ salo के अनुभव के बाद इनके तीन दोस्तों ने मिलकर गुप्र तैयार किया और अब वे फिल्में बनाते हैं. गुरमीत का मानना है कि अगर आपकी फिल्में अच्छी होंगी तो फंड का इंतजाम जरूर हो जायेगा. गुरमीत की film को सीएम वातावरण अवार्ड भी मिल चुका है. aanewale समय में वह फीचर फिल्म बनाने की भी इच्छा रखते हैं. वाइल्ड life फिल्में बनाने के दौरान कभी चोट नहीं आयी, यह पूछने पर वह बताते हैं कि alert रहता हूं, छोटी-मोटी चोटें तो आती हैं. वैसे भी जंगbी जानवरों से अधिक छोटे-छोटे मच्छर अधिक तंग करते हैं. फिल्म मेकिंग के साथ-साथ इन्हें behatariin photography करने का भी शौक है. वे फिल्ममेकिंग पृथ्वी की सबसे रोमांचकारी दुनिया मानते हैं.
ेरांची के विनीत को करमवीर पुरस्कार सम्मान

ेरांची के विनीत को करमवीर पुरस्कार समानं .आइटी पंडित माने जानेवाले े नेशनल एंटी हैकिंग गुप्र के विनीत को करमवीर पुरस्कार से सम्मानित किया गया . यह सम्मान उन्हें इसी वर्ष 26 नवंबर को राजघाट में दिया गया . विनीत ने अपनी नान प्रॉफिताब्ले कंपनी नेशनल हैकिंग गुप्र के माध्यम से लोगो को आइटी क्षेत्र में होनेवाले क्राइम से अवगत कराया और साथ ही साथ जागरूकता भी फैलायी. उनकी कंपनी इथिक हैकिंग में विश्व के नामी कॉरपोरेट हाउसेज और सरकारी संगठनों को सुविधाएं दे रही है।सूचना तकनीक के क्षेत्र में उन्हें रास्ट्रीय विशेषज्ञ भी माना जाता है. विश्वभर में साइबर क्राइम को दूर करने में भी विनीत ने अहम भूमिका निभायी. रांची के आर्मी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वे लगातार सामाजिक कार्यों में जुटे रहे हैं. आइटी क्षेत्र के माध्यम से ही उन्होंने हेल्पएज इंडिया के भी कई सफल प्रोजेक्ट्स किये. वे हमेशा से समाज के लिए कुछ न कुछ करना चाहते थे. स्कूल के दौरान भी इन्होंने विकलांग लोगो के लिए कई प्रयास किये. उन्हें यह सम्मान उनकी इन्हीं उपलब्धियों के लिए दिया जा रहा है. विनीत को हाल में ही इस वर्ष का यूएन यंग अचीवर अवार्ड से नवाजा जा चुका है. इसके अलावा उन्हें रास्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं. सामाजिक स्तर पर विनीत ने पर्यावरण के क्षेत्र में भी कई काम किये है. मशहूर अभिनेता राहुल बोस, पॉप गायक रेमो, टेनिस प्लेयर महेश भूपति को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। फिŸल्म कbाकार व एंकर फारूक रुख शेख व सुप्रसिद्ध अभिनेत्री काजोल जैसी हस्तियों ने भी इस आयोजन में शिरकत किया . यह सम्मान उन नागरिकों को प्रदान किया जाता है, जो सामाजिक मूल्यों के साथ समाज के bिए कुछ करने का जज्बा रखते हों. करमवीर पुरस्कार ऐसे जज्बों को चेंज द्रिमेर के रूप में सलाम करती है.
अपने घर में बेगाने क्यों हैं यंग स्पर्कास

हेल्लो दोस्त, आप सभी से एक सवाल पूछना चाहता हूं। जब भी हमारे घर कोई बाहर से आता है, तो हम उसकी जी हुजूरी में lag जाते हैं. हमारी नजर में वही सुपर हीरो होता है. और इस चक्कर में हम अपनों को बेगाने बना देते हैं. झारखंड से हर दिन कई प्रतिभाएं कारनामे दिखा रही हैं. पर हम हैं कि केवल एक राग का ही अलाप करते रह जाते हैं. तो दोस्तों, अब आप ही तय करें कि क्या पूरे देश में स्पार्क करनेवाला यंग स्पार्किंग ब्वॉय यहां अपने ही गांव में बेगाने क्यों. अगर विश्वास नहीं तो अपना जवाब इस आलेख को पढ़ने के बाद दें।
पटना में आइआइटी, मेडिकल , मैनेजमेंट, फैश्न, सहित अन्य क्षेत्रों में राज्य का नाम रोशन करनेवाला युवा बिहारी प्रतिभाआं को सम्मानित किया गया। अमूमन इसमें policekarmi , प्रशासक, राजनीतिज्ञ, khilari सहित अन्य क्षेत्रों के लोग होंगे. लेकिन उस list में किसी टॉपर (इंजीनियरिंग, मेडिकल b) युवा उद्यमी, लेखक, फिल्मकार , kalkaar या यूथ अचीवर्स का नाम शायद ही हो. झारखंड के रांची, बोका रो, जमशेदपुर, धनबाद से औसतन दो-तीन सौ छात्र आइआइटी entrence पास करते हैं, जिनमें से दर्जनों टॉप-100 में होते हैं. इस कारण इन शहरों व यहां के स्कूलो को माइंस आफ आइआइटीयंस भी कहते हैं. मेडिकल , मैनेजमेंट में भी झारखंडी छात्रों को रिkord शानदार है. लेकिन ऐसे टॉपर्स को प्रतीकात्मक ही सही सम्मानित करने की कोई परंपरा नहीं है. विश्व प्रसिद्ध landon school आफ इकोनॉमिक्स mei प्रवेश पानेवाli एकमात्र छात्रा रांची की हर्षिका सिंह और जेएनयू के एमसीए entrence की टॉपर (हां, एक आदिवासी लड़की के बारे में बहुतों को पता भी नहीं है. कितने लोग हजारीबाग के युवा निर्देशक व पटकथा lekखक राजकुमार gupta को जानते हैं, जिन्होंने चर्चित फिल्म “आमिर‘ निर्देशित की. los एंजिल्स के इंटरनेशनल फिल्म festival “वै आफ फ्वर‘ फिल्म में म्यूजिक कंपोजिंग के लिए रांची के विवेक अस्थाना सम्मानित हुए. प्prena सिद्धार्थ ने चैनल वी का म्यूजिक contest जीता और अब एक सोशल एंटरप्रेन्योर है. खूंटी के सिद्धार्थ प्रसाद दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक महाप्रयोग से जुड़े रहे. रांची से taalookh रखनेवाला अनीरबन बोस की किताब “बॉम्बे रेन्स बॉम्बे गल्र्स‘ पूरे देश में सराही गयी. जमशेदपुर के तुहिन शर्मा की दूसरी किताब “22 यार्ड‘ भी चर्चित रही. दोनों पुस्तक बेस्टसेlar मानी गयीं, पर हमें इनके बारे में पता नहीं. कुछ अरसा पहले हमारे राज्य को एक ब्रांड एंबेसडर की तlash थी, जिसके लिए अफसरों ने बॉliwood की एक आइटम girl को चुना. उस अभिनेत्री की छवि की बात छोड़ भी दें, वह झारखंड ki थी भी नहीं. ”या हमारे राज्य में प्रियंका चोपड़ा, आर माधवन, तनुश्री दत्ता, इम्तियाज अli , विनय पाठक और उभरती playback सिंगर शिल्पा राव जैसी झारखंड से talookh रखनेवाli सिने हस्तियां नहीं हैं? “जब वी मेट‘ से बॉli वुड में बेहद चर्चित डायरेक्टर बन चुके जमशेदपुर के इम्तियाज ali और अभिनेत्री तनुश्री तो झारखंड के ही हैं. “भेजा फ्राइ‘, “खोसला का ghosla ‘ फिŸल्मों से मशहूर हुए विनय पाठक तो धनबाद ही के हैं. बॉलीवुड में स्थापित हो चुके माधवन, प्रियंका, शिल्पा राव को नन रेसिडेंट झारखंडी (एनआरजे) भी मानें तो क्या राज्य सरकार एनआरआइ के तर्ज पर उन्हें सम्मानित नहीं कर सकती? सभी को झारखंड रत्न या झारखंड गौरव सम्मान दिया जाये, यह व्यावहारिक नहीं. पर प्रतिभाओं का सम्मान राज्य, सरकार व समाज के विश्वास और प्रोत्साहन का प्रतीक होता है. हमारे राज्य के युवा उद्यमी अन्य जगहों पर नाम कमा रहे हैं. लेकिन यहां अगर वे कुछ करना चाहते हैं तो हमारा सिस्टम या तो इससे अनभिज्ञ रहता है या मदद को हाथ नहीं बढ़ाता. ब्रिटिश काउंसिलिंग के यंग इंडियन अवार्ड के रनरअप एंटरप्रेन्योर आनंद प्रकाश डाल्टनगंज से हैं, जिनके ग्रीटिंग्स और हंडमेड प्रोडkat अमेरिका , यूरोप, ब्रिटेन में बिग हिट हैं. धनबाद के अंशुमन (बीन्स एंड intercact फाइनेंसियल टेक), साहेबगंज के रविशंकर (रेंटफॉरश्योर डॉटकम), रांची के विनीत (इथिककल हैकर और नैग के एमडी) और गौरव (कैटइंडिया आन line डॉटकम), बोकारो के प्रभात सिंह (रेविरल टेक्नोlogy ), जमशेदपुर के नीरज (इवेंट्स इंडिया डॉटकॉम) जैसे ढेरों युवा उद्यमी उपेक्षित हैं. उधर बिहार में सरकारी प्रयासों से बिहारी युवा उद्यमी अब राज्य को अपना कार्यक्षेत्र बनाने लेंगे हैं. दरअसल इन युवा प्रतिभाओं की उपेक्षा करना हमारे और राज्य के भविष्य की उपेक्षा है. बिना किसी सहयोग या प्रोत्साहन के जब हमारे युवा इतना कुछ कर सकते हैं तो उन्हें सहयोग देकर हम उन्हें और आगे kyu नहीं बढ़ाना चाहते? बाहर में जब नाम कमा सकते हैं, तब ही हमें इनके बारे में क्यों पता चल ता है? तमाम नाउम्मीदी के बीच झारखंड में उम्मीदें हैं. झारखंडी युवाओं की इन छोटी-बड़ी उपलब्धियों के संदेश गहरे हैं
Wednesday, February 4, 2009
चेतन भगत की राह पर झारखंड का नौजवान अनिमेष

चेतन भगत, अरविंद अडिग, पलाश मेहरोत्रा, शरबानी बसु... भारत की युवा पीढी के ये चर्चित नाम दुनिया भर में दस्तक दे रहे हैं। दुनिया में नये व अभिनव प्रयोग के कारन इन युवा लेखंको की शोहरत व ख्याति चहुंओर है. इनकी ख्याति अथ्वा कृतित्व से अनिमेष वर्मा की तुलना करना उचित नहीं लगता लेकिन झारखंड का यह 24 वर्षीय नौजवान भी अहिस्ता-अहिस्ता उसी राह पर है.अनिमेष का पहला उपन्यास लब लाइफ ...' विगत माह ही आया है. कुछ ही दिनों में इस उपन्यास का तीसरा संस्करण् बाजार में आने को तैयार है. यह उपन्यास डेल्ही में दो वर्ष पूर्व हुए बम विस्फोट और आरक्षण् आंदोलन पर केद्रित है. धनबाद के डेनोबिली स्कू और जमशेदपुर केŸ बेल्डीह चर्च स्कूलो में पढाई करने के बाद अनिमेष डेल्ही के हिंदू कोलेज के छात्र रहे हैं और फिल हाल आइआइटी- मुंबई में अध्ययनरत हैं. यूं तो अनिमेष आइआइटी में एंटी कैसर मोल्कुएल पर प्रयोग करने में लगे हुए हैं लेकिन उनके जहन में अब दूसरे उपन्यास का पार्ट भी तैयार हो रहा है. फोन पर बातचीत में अनिमेष कहते हैं की लेखन ही मेरा प्रोफेसन होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है लेकिन अधिक से अधिक लिखना चाहता हूं. क्यूंकि मुझे पहले उपन्यास लिखते हुए यह मालूम हो चुका है कि यदि आपके पास बढियां पार्ट अच्छी कहानी है तो फिर प्रकाशकों की कोई कमी नहीं. जैसा कि मेरे साथ हुआ. मैंने सिर्फ एक बार प्रकाशन से संपर्क किया और वे उपन्यास छापने को तैयार हो गये.झारखंड को समर्पित है मेरा पहला उपन्यास।अनिमेष का कहना है कि उनका पहला उपन्यास झारखंड को समर्पित है। वे झारखंड के रहनेवाले हैं, इस बात ka उन्हें हमेशा गर्व रहता है. बात जहां तक राजनीतिक अराजकता या अस्थिरता की या फिर झारखंड की बाहर में बदनामी की है तो इन सभी से छुटकारा दिलाने में युवाओं को ही भूमिका निभानी होगी. युवाओं को राजनीति मं हस्तक्षेप करना होगा. बडे स्तर पर न सही, अपने गांव-मोहल्ले में ही यह शुरुआत हो.
अब तक ऐसी चुप्पी













