Wednesday, February 4, 2009

अब तक ऐसी चुप्पी


पूनम चौबे

कुछ दिनों पहले मंगलोर में हुई पब घटना को देखते हुए ये कहना तो बिल्कुल सार्थक लगता है की हर अधिकार को जीने का हक़ सिर्फ़ कुछ खास लोगों को ही है। इस कम से प्रमोद मुतालिक को भी खुशी का इक नया बहाना मिल गया। आखिरकार पॉलिटिकल स्टंट बनाने कुछ तो होना ही चाहिए। लेकिन कहीं ऐसा तो नही की इस घटना से वो हम यूथ्स को १४ फरवरी के लिए भी सतर्क कर देना चाहते हो। अगर सचमुच प्रमोद की सोच ऐसी है तो फ़िर यारों हमें भी कुछ सोचना ही पडेगा। ऐसे कारनामे तो अब पुलिस से भी हमारा विस्वास उठा देंगे। क्यों है न। अरे जब पब में प्रमोद की चल सकती है तो पार्क और रेस्त्रोरौंत तो..... अरे यार हम तो भारत में देवी पूजन का अनुष्ठान करते है। हर दुशारा , दिवाली पर देवी को याद करते है .फ़िर यह हाथ उठाने की ऐसी बेहूदा हरकत पर हमने ख़ुद को किनारे क्यों कर लिया। अब इसका जवाब तो आपके आने वाले वलेन्तीना डे तक देना ही होगा। ओके वी आर वेटिंग फॉर योर कमेन्ट उन दिस इस्सु। अगर दम उनकी बाजुओं में है तो हम क्या खाक इस जमीं पर है इससे तो अच्छी तो वो है जो ख़तम होने के बाद भी किसी के कम आती है

No comments:

Post a Comment