
आइआइटी में पढ रहे अनिमेष का पहला उपन्यास चरचे में, महीने भर में तीन संस्करण् आतंकी घटना और अरक्षना आंदोलन से प्रभावित है " लव, लाइफ एंड डीम आन...'
निराला
चेतन भगत, अरविंद अडिग, पलाश मेहरोत्रा, शरबानी बसु... भारत की युवा पीढी के ये चर्चित नाम दुनिया भर में दस्तक दे रहे हैं। दुनिया में नये व अभिनव प्रयोग के कारन इन युवा लेखंको की शोहरत व ख्याति चहुंओर है. इनकी ख्याति अथ्वा कृतित्व से अनिमेष वर्मा की तुलना करना उचित नहीं लगता लेकिन झारखंड का यह 24 वर्षीय नौजवान भी अहिस्ता-अहिस्ता उसी राह पर है.अनिमेष का पहला उपन्यास लब लाइफ ...' विगत माह ही आया है. कुछ ही दिनों में इस उपन्यास का तीसरा संस्करण् बाजार में आने को तैयार है. यह उपन्यास डेल्ही में दो वर्ष पूर्व हुए बम विस्फोट और आरक्षण् आंदोलन पर केद्रित है. धनबाद के डेनोबिली स्कू और जमशेदपुर केŸ बेल्डीह चर्च स्कूलो में पढाई करने के बाद अनिमेष डेल्ही के हिंदू कोलेज के छात्र रहे हैं और फिल हाल आइआइटी- मुंबई में अध्ययनरत हैं. यूं तो अनिमेष आइआइटी में एंटी कैसर मोल्कुएल पर प्रयोग करने में लगे हुए हैं लेकिन उनके जहन में अब दूसरे उपन्यास का पार्ट भी तैयार हो रहा है. फोन पर बातचीत में अनिमेष कहते हैं की लेखन ही मेरा प्रोफेसन होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है लेकिन अधिक से अधिक लिखना चाहता हूं. क्यूंकि मुझे पहले उपन्यास लिखते हुए यह मालूम हो चुका है कि यदि आपके पास बढियां पार्ट अच्छी कहानी है तो फिर प्रकाशकों की कोई कमी नहीं. जैसा कि मेरे साथ हुआ. मैंने सिर्फ एक बार प्रकाशन से संपर्क किया और वे उपन्यास छापने को तैयार हो गये.झारखंड को समर्पित है मेरा पहला उपन्यास।अनिमेष का कहना है कि उनका पहला उपन्यास झारखंड को समर्पित है। वे झारखंड के रहनेवाले हैं, इस बात ka उन्हें हमेशा गर्व रहता है. बात जहां तक राजनीतिक अराजकता या अस्थिरता की या फिर झारखंड की बाहर में बदनामी की है तो इन सभी से छुटकारा दिलाने में युवाओं को ही भूमिका निभानी होगी. युवाओं को राजनीति मं हस्तक्षेप करना होगा. बडे स्तर पर न सही, अपने गांव-मोहल्ले में ही यह शुरुआत हो.
चेतन भगत, अरविंद अडिग, पलाश मेहरोत्रा, शरबानी बसु... भारत की युवा पीढी के ये चर्चित नाम दुनिया भर में दस्तक दे रहे हैं। दुनिया में नये व अभिनव प्रयोग के कारन इन युवा लेखंको की शोहरत व ख्याति चहुंओर है. इनकी ख्याति अथ्वा कृतित्व से अनिमेष वर्मा की तुलना करना उचित नहीं लगता लेकिन झारखंड का यह 24 वर्षीय नौजवान भी अहिस्ता-अहिस्ता उसी राह पर है.अनिमेष का पहला उपन्यास लब लाइफ ...' विगत माह ही आया है. कुछ ही दिनों में इस उपन्यास का तीसरा संस्करण् बाजार में आने को तैयार है. यह उपन्यास डेल्ही में दो वर्ष पूर्व हुए बम विस्फोट और आरक्षण् आंदोलन पर केद्रित है. धनबाद के डेनोबिली स्कू और जमशेदपुर केŸ बेल्डीह चर्च स्कूलो में पढाई करने के बाद अनिमेष डेल्ही के हिंदू कोलेज के छात्र रहे हैं और फिल हाल आइआइटी- मुंबई में अध्ययनरत हैं. यूं तो अनिमेष आइआइटी में एंटी कैसर मोल्कुएल पर प्रयोग करने में लगे हुए हैं लेकिन उनके जहन में अब दूसरे उपन्यास का पार्ट भी तैयार हो रहा है. फोन पर बातचीत में अनिमेष कहते हैं की लेखन ही मेरा प्रोफेसन होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुआ है लेकिन अधिक से अधिक लिखना चाहता हूं. क्यूंकि मुझे पहले उपन्यास लिखते हुए यह मालूम हो चुका है कि यदि आपके पास बढियां पार्ट अच्छी कहानी है तो फिर प्रकाशकों की कोई कमी नहीं. जैसा कि मेरे साथ हुआ. मैंने सिर्फ एक बार प्रकाशन से संपर्क किया और वे उपन्यास छापने को तैयार हो गये.झारखंड को समर्पित है मेरा पहला उपन्यास।अनिमेष का कहना है कि उनका पहला उपन्यास झारखंड को समर्पित है। वे झारखंड के रहनेवाले हैं, इस बात ka उन्हें हमेशा गर्व रहता है. बात जहां तक राजनीतिक अराजकता या अस्थिरता की या फिर झारखंड की बाहर में बदनामी की है तो इन सभी से छुटकारा दिलाने में युवाओं को ही भूमिका निभानी होगी. युवाओं को राजनीति मं हस्तक्षेप करना होगा. बडे स्तर पर न सही, अपने गांव-मोहल्ले में ही यह शुरुआत हो.

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