Thursday, April 23, 2009

सबसे कम उम्र की महिला उद्यमी प्रेरणा सिद्धार्थ

फिल्मों के माध्यम से फर्राट्टेदार अंगरेजी सिखेंगे झुग्गी झोपड़ी के बचे ।
प्रज्ञा एडुकॉम व भारत शोध का संयुक्त सार्थक प्रयास के साथ आगे बढ़ रही हैं prena
झोपड़ी में रहनेवाले अपने बेहतर भविष्य के लिए अंगरेजी भाषा का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं. फिल्ममेकर प्रेरणा सिद्धार्थ इस ओर सार्थक कदम उठा रही हैं. 19 वर्षीय प्रेरणा सिद्धार्थ झारखंड की सबसे युवा महिला उद्यमी हैं. प्रज्ञा एडुकॉम की एमडी प्रेरणा मूल रूप से फिल्ममेकर हैं और अपनी फिल्मों के माध्यम से वह झारखंड के ग्रामीण इलाको में शिक्षा की रोशनी फैलाना चाहती हैं. एनजीओ भारत शोध व प्रज्ञा एडुकॉम वीडियो के संयुक्त प्रयास से गांवों में अंगरेजी भाषा की शुरुआत की जा रही है. प्रेरणा का मानना है कि गांवों के कई इलाको में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं न सही. पर वे फिल्में जरूर देखते हैं. और फिल्मों से जल्दी सिखने का प्रयास करते हैं। यही वजह है कि मैंने इस माध्यम को चुना. ए वीडियो बुक सिरीज आन लर्न इंग्लिश बाय फन जो इनके पिता आइपीएस पीके सिद्धार्थ ने likhi है, इसके माध्यम से कब्ड्डी, गिल्ली डंडा व स्थानीय खेलों के माध्यम से भाषा की बारीकियों को दर्शाया व सिखाया जायेगा. ये वीडियो प्रोग्राम हिंदी के साथ-साथ नागपुरी, संथाली व अन्य स्थानीय भाषाओं में भी होगा, ताकि झारखंड के ज्यादा से ज्यादा इससे laभान्वित हो पायें। इस प्रोग्राम के माध्यम से प्रेना ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ने का तो प्रयास कर ही रही है. साथ ही वह अपने इस विजन में भी स्पस्ट है कि वह अंग्रेजी भाषा का ज्ञान देना चाहती है न कि उन्हें अंगरेज बनाना चाहती है. प्रोग्राम के प्रचार में मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित किया जा रहा है कि जब तक हम आप, हम सभी मातृभाषा का सम्मान नहीं करते, अंगरेजी या किसी अन्य भाषा को जानने का कोई फायदा नहीं. आने वाले दौर में अंगरेजी का ज्ञान न होने के कारण ये उज्वल भविष्य से अछूते न रह जायें. इसलिए यह शुरुआत की गयी है. इस वीडियो प्रोग्राम को स्थानीय थियेटरों व कैंपेन के द्वारा लोगों तक पहुंचाया जायेगा. प्रेरणा रांची की रहनेवाली है. इनकी प्राथमिक शिक्षा रांची से ही पूरी हुई है. इन्होंने एशियन स्कूल आफ फिल्म एंड टेलिविज़न -नोयेडा से डायरेक्शन का कोर्स पूरा किया. सारेगामापा के लिए इन्होंने एल्बम अंडरग्राउंड दिलीई का निर्माण भी किया. प्रेरणा का चयन सारेगामा डायरेक्टर सर्च में छह फिल्म निर्देशकों में भी हुआ है. पर वह मुख्य रूप से झारखंड में ही काम करना चाहती हैं. उनका मानना है कि झारखंड में कला -संस्कृति, सभ्यता व पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें विजुअलोन मीडियम के माध्यम से और ख़ूबसूरत बनाया जा सकता रूप दिया जा सकता है. साथ ही यहां ग्रामीण जो muflisi के कारण पढ़ नहीं पाते, उन्हें शिक्षित करना जरूरी है, क्योंकि उनमें बेहतरीन प्रतिभा छुपी हुई है. उनके दर्शाना होगा और विजुअलोन से आसान माध्यम और कुछ नहीं हो सकता. भविष्य में वे ऐसे ही ग्रामीण विकास पर आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहती हैं.

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