Sunday, March 1, 2009

गोरी तेरा ganv बड़ा प्यारा

poonam choubey
लोगों से कहते हुए सुना है कि जोड़ियां स्वर्ग में बनती है(हालाँकि आजकल कॉलेज कैम्पस, मॉल्स के कॉरीडोर, पार्क, कोचिंग सेंटर, और आनलाइन भी बनने लगी हैं) पर इन जोड़ियों के सात जन्मों तक साथ रहने का वादा तो इसी धरा पर तय होता है. दुनिया भले ही एक लम्बी रफ्तार से आगे बढ़ती जाए, मगर आज भी कई लड़कों को घरेलू और गांव की लड़कियां ही अपनी जीवनसंगीनी के रूप में नजर आती है। ऐसा क्या है खास जिसकŸी एक नजर ने इन्हें शहर की छोरी छोड़ गांव की गोरी की ओर खिंच दिया।
आखिर कुड़ी जंच ही गई
नमिषा-परिजात को ही देख लीजिये . नमिषा आरा के एक छोटे से गांव की रहने वाली है. एमसीए करने के दौरान ही परिजात का रिश्ता उनके लिए आया. परिजात खुद भी एमसीए करने के बाद पटना की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. शहर में पढ़ाई और नौकरी करने केŸ बावजूद परिजात को गांव की घरेलू लड़की ही चाहिए थी। gharwalon को नमिषा पसंद आ गई और परिजात ने भी हां कर दी। शादी के दो sal होने के बावजूद दोनों में किसी भी बात को लेकर कोई नोक-झोंक नहीं होती. वैसे खट्टी-मीठी तकरार तो chalti ही रहती है. इन्हें देखकर नहीं लगता कि एक गांव की छोरी दूजा शहर का बाबू।
मां की पसंद का जवाब नहीं
manoj भारती की बात करें तो इनकी कहानी एक अलग ही ट्विस्ट दिखाती है. मनोज की मम्मी को बहू के रूप में घरेलू लड़की चाहिए थी. जबकि चार्टेड एकांउटेंट मनोज पत्नी के रूप में मेट­ो girl के पक्ष में थे। मगर मां-पापा की जिद्द पर एक बार भारती से mulakat ने इनका मूड झट से badal दिया. इनका कहना है कि संस्कारों से परिपूणर््ा भारती में मुझे ऐसी कोई बात नहीं दिखी जो ये साबित करे कि वह किसी साधारण्ा गांव की है. भारती से शादी के बाद मनोज ने भी मान लिया कि आखिर उनकी मां ने उनके लिए गांव की गोरी ही क्यों चुनी।
मुझे शहरों की लड़कियां पसंद नहीं
अगर श्वाति और सुधीर के रिश्ते की bat की जाए, तो सुधीर को pahle से ही गांव की किसी sadharan मगर खूबसूरत गोरी को ही अपनी जीवनसंगिनी बनाने का ख्याल था। श्वाति के साथ रिश्ते की बात होते ही उन्हें लगा कि जो उन्होंने मांगा वही मिला। पढ़ी- likhi और चांद-सी खूबसूरत श्वाति की फोटो देख कर ही सुधीर ने शादी के liye हां कर दी थी. सुधीर खुद एक बिजनेसमैन हैं. उन्हें ऐसी पत्नी चाहिए थी जो घर के साथ उनके बिजनेस को भी समझ सके। और ये सभी बातें swati me उन्हें मिली है. वह तो आज भी अपनी पत्नी को देखकर यही गुनगुनाते हैं तु जो ना होती तो कुछ भी न होता, हम भी न होते ये जहां भी न होता
chakachondh की life पर simple हो वाइफ
pragati -वेदप्रकाश की कहानी औरों से थोड़ी अलग है। delhi में सॉफ्टवेयर इंजीनियर वेद को भले ही delhi की चकाचौंध पसंद हो, पर उन्हें हमसफर तो village girl ही चाहिए थी। वेद को वैसी लड़की चाहिए थी जो गांव की तो हो मगर वह उनके साथ हर mahol में एडजस्ट कर सके. और pragati उनके khayalon की mallika बनने में सौ फीसदी खरी उतरी। अब तो वेद भी मानने lagen हैं कि गांव की गोरी का selection उनके लिए काफी lucky रहा.
जिसके बनाये खाने me माँ के hath का jadu दिखे
rashmi-satish के bare me अगर कहा जाए to satish को हमेशा से ganw की ही गोरी चाहिए थी जो unhe उनकी माँ के hathon jase खाने का maja chakha सके उनका पुरा ख्याल रखे और unhe ढेर sara प्यार दे। dahej me अपने sath संस्कार और viswas का खजाना लेकर आए । बस इसी ख्याल के sath उन्होंने rashmi के sath ये sat janmon का bandhan बाँध लिया।
मुझे to बस सुंदर kudi चाहिए
beby-ॐ के रिश्ते me प्यार के अलावा किसी और chij की जगह है ही नहीं। यही karan था की ॐ ने shadi से pahle ही अपने gharwalon से कह दिया था की उन्हें वही लड़की चाहिए जो sanskaron me pali badhi हो. बस dahej के रूप me इस nayab tihfe को लेकर ॐ ने जनम जनम के इस riste me bebi को बाँध लिया.

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